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कृत्रिम बुद्धिमत्ता और मशीन लर्निंग

क्या अब मानव को अपने ही द्वारा बनाए गए कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जोकि विज्ञान का एक नवीनतम विकास है से डर लगने लगा है ? जी हां बिल्कुल आपने सही पढ़ा I क्यूंकि आजकल वैश्विक स्तर पर बुद्धिजीवियों में यह चर्चा का विषय बना हुआ है कि क्या कृत्रिम बुद्धिमता आने वाले समय में विश्व में मानव बुद्धिमत्ता आधारित श्रम को हटाकर विज्ञान व तकनीकी आधारित कार्यों को मशीने सम्पन्न करेंगीं और लोग बेरोजगार होंगें और कृत्रिम बुद्धिमत्ता मानव सभ्यता के लिए खतरा या संकट बन सकती है?

जैसा कि वर्ष 2010 में आई फिल्म रोबोट में दिखाया गया है कि किस प्रकार एक मशीन मानव की तुलना में किसी भी कार्य को बेहतर ढंग से अत्यंत कम समय में प्रभावी तौर पर कर सकती है I

क्यूंकि इटली ने हाल ही में कृत्रिम बुद्धि को अपने देश में पाबंदी लगाने की दिशा में पहल की है एवं यूरोपीय देश भी इस दिशा में विचारशील हैं I  विश्व में विज्ञान एवं तकनीकी के विकास का इतिहास अगर हम देखें तो यह पाते हैं कि ब्रिटेन में 18वीं शताब्दी में शुरू हुई पहली औद्योगिक क्रान्ति ने दुनिया की अर्थव्यवस्था और समाज को महत्त्वपूर्ण  रूप से प्रभावित किया I

भाप इंजन जैसी नई मशीनरी और प्रौद्योगिकियों की शुरूआत ने कृषि, विनिर्माण एवं यातायात उद्योग को बदल दिया और कारखानों और बड़े पैमाने पर उत्पादन में वृद्धि हुई। इस प्रकार प्रथम औद्योगिक क्रान्ति ने कृषि, विनिर्माण और परिवहन में महत्वपूर्ण परिवर्तन किए और आधुनिक औद्योगिक समाजों की नींव रखी। जबकि 19वीं शताब्दी में विज्ञान एवं तकनीकी के प्रभाव से द्वितीय औद्योगिक क्रांति की शुरुआत हुई I 

कृत्रिम बुद्धिमत्ता

जिससे असेंबली लाइन, बिजली और आंतरिक दहन इंजन जैसी नई तकनीकों का उपयोग करके माल के बड़े पैमाने पर उत्पादन की विशेषता मानव ने हासिल की ।  द्वितीय औद्योगिक क्रांति ने ऑटोमोबाइल, घरेलू उपकरण, टेलीफोन, बिजली परिवहन और संचार के क्षेत्र में विशेषकर प्रगति की और शहरीकरण की प्रक्रिया की नीव रखी । 

इस प्रकार प्रथम एवं द्वितीय औद्योगिक क्रांति ने सामाजिक परिवर्तन की दिशा को नये आयाम देते हुये शहरीकरण की प्रक्रिया से लोगों को जोड़ते हुये उनके रहने और काम करने के तरीके में बदलाव किया । 

वहीं 20वीं सदी के मध्य में शुरू हुई तीसरी औद्योगिक क्रांति जिसे डिजिटल क्रांति भी कहा जाता है ने इलेक्ट्रॉनिक्स, कंप्यूटर और दूरसंचार के विकास को चिह्नित किया I जिसके परिणामस्वरूप मोबाइल फोन, इंटरनेट, हवाई यात्रा और मनोरंजन सेवाओं की उत्त्पति हुयी ।

इस क्रांति ने कई मानव श्रम आधारित नौकरियों के स्वचालन और सेवा क्षेत्र की वृद्धि को जन्म दिया। जबकी चौथी औद्योगिक क्रांति के अंतर्गत कृत्रिम बुद्धिमत्ता, रोबोटिक्स और इंटरनेट ऑफ थिंग्स जैसी उन्नत तकनीकों के एकीकरण  से विभिन्न प्रकार के नवाचारों की दिशा में कार्य हो रहा है I 

अब अगर हम आज अपने आस-पास देखें तो हम यह साफ़ तौर पर समझ सकते हैं कि मानव जीवन के अस्तित्व हेतु आवश्यक मूलभूत आवश्यकताओं जैसे भोजन कपड़ा एवं मकान के बाद मोबाइल, इंटरनेट एवं फेसबुक इत्यादि ने समाज के प्रत्येक वर्ग चाहे वह दिहाड़ी मजदूर हो या आर्थिक रूप से सम्पन्न प्रभावशाली व्यक्ति सभी के जीवन में अपनी महत्त्वपूर्ण जगह बना ली है I 

हमारे दैनिक जीवन में विज्ञान एवं तकनीकी के सभी महत्त्वपूर्ण योगदानों को अगर हम देखें चाहे वह चिकित्सा का क्षेत्र हो या फिर यातायात या कृषि, शिक्षा, संचार, मनोरंजन, या फिर ऊर्जा एवं शक्ति सभी में मानव जीवन की गुणवत्ता को बढ़ाया ही  है I 

परन्तु प्रश्न पुनः यही उठता है कि क्या विज्ञान एवं तकनीकी में नवाचार का परिणाम मानव सभ्यता एवं अस्तित्व हेतु अवांछनीय हो सकता है ? क्या कृत्रिम बुद्धिमत्ता मानव बुद्धिमत्ता हेतु अभिशाप बन सकती है ?

तो व्यक्तिगत तौर पर मेरा यह मानना है कि मानव सृजित कृत्रिम बुद्धिमत्ता से मानव को कभी भी खतरा नहीं हो सकता I क्यूंकि कृत्रिम बुद्धिमत्ता भले ही आज मानव की तरह सोचकर कुछ कार्यों को बेहतर ढंग से कर सकने में सक्षम हो परन्तु मानव मस्तिस्क जैसे रचनात्मक, भावनात्मक, एवं सहजात्मक रूप से सोचने, समझने एवं निर्णय लेने की क्षमता मशीनों में नहीं लाई जा सकती है I कृत्रिम बुद्धिमत्ता सदैव कृत्रिम ही रहेगी I

हाँ यह जरुर है कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता मानव की एक अच्छी सहयोगी होकर मानव जीवन के गुणात्मक स्तर को बेहतर करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभायेगी I क्यूंकि वर्तमान में विभिन्न कंपनियां कृत्रिम बुद्धिमत्ता एवं मशीन लर्निंग का उपयोग व्यापक रूप से अपने व्यवसायों को आगे बढ़ाने में कर रही हैं।

एआई तकनीक के जरिए ये कंपनियां उन्नत सेवाओं और उत्पादों के निर्माण के साथ-साथ, अपने कारोबार को और भी सहज बनाने का प्रयास कर रही हैं। उदाहरण के तौर पर एमेज़ॅन एआई तकनीक का उपयोग अपने उत्पादों को सम्भावित ग्राहकों

 के सामने खरीदारी हेतु सिफारिशों हेतु प्रस्तुत करती है I जबकि फेसबुक अपने उपयोगकर्ताओं के डेटा को विश्लेषित कर उनके लिए व्यक्तिगत न्यूज़ फीड तैयार करती है। नेटफ्लिक्स, यूबर और पेपलपैल भी एआई तकनीक का उपयोग कर अपनी सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए प्रयासरत हैं।

What is product?

मशीन लर्निंग तकनीक के जरिए कंपनियां उपयोगकर्ताओं के डेटा को विश्लेषित कर, उन्हें अपनी सेवाओं का विशेष उपयोग करने वाले संभावित ग्राहकों को उनकी उत्पादों के लिए सुझाव देती हैं। अतः इस प्रकार मानव निर्मित कृत्रिम बुद्धिमता समाज के विभिन्न क्षेत्रों में सहायक जरुर होगी परन्तु अपने जनक को भी चुनौती दे सके, यह समय ही बतायेगा ।

FAQs

  1. कृत्रिम बुद्धिमत्ता क्या है? – यह मानव-बनाएं हुए बुद्धिमत्ता के विकास को दर्शाने वाली तकनीक है।
  2. मशीन लर्निंग क्या है? – यह कृत्रिम बुद्धिमत्ता का एक उप-शाखा है, जिसमें मशीनें अपने आप सीखती हैं।
  3. कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उपयोग कहाँ होता है? – इसका उपयोग विभिन्न सेक्टरों में जैसे विज्ञान, स्वास्थ्य, वित्त, और संचार में होता है।
  4. मशीन लर्निंग का उदाहरण क्या है? – स्वचालित गाड़ियों, विज्ञान संशोधन, और अनुवाद के क्षेत्र में मशीन लर्निंग का उदाहरण है।
  5. कृत्रिम बुद्धिमत्ता और मशीन लर्निंग में अंतर क्या है? – कृत्रिम बुद्धिमत्ता एक विशिष्ट तकनीक है, जबकि मशीन लर्निंग उसका उप-शाखा है।
  6. सुपरवाईज्ड और अनुप्रवेशित मशीन लर्निंग में अंतर क्या है? – सुपरवाईज्ड में प्रशिक्षण डेटा में नामित लेबल होते हैं, जबकि अनुप्रवेशित में लेबल नहीं होते हैं।
  7. न्यूरल नेटवर्क क्या है? – यह कृत्रिम बुद्धिमत्ता में एक तकनीक है, जो मानव के न्यूरॉन्स पर आधारित है।
  8. स्वार्थी बुद्धिमत्ता और सामाजिक बुद्धिमत्ता क्या होता है? – स्वार्थी बुद्धिमत्ता एक व्यक्ति के लाभ को ध्यान में रखती है, जबकि सामाजिक बुद्धिमत्ता समाज के हित को महत्व देती है।
  9. डीप लर्निंग क्या है? – यह एक उन्नत स्तर का मशीन लर्निंग है, जिसमें बड़े और जटिल न्यूरल नेटवर्क का उपयोग होता है।
  10. कृत्रिम बुद्धिमत्ता और मशीन लर्निंग का भविष्य क्या है? – यह तकनीक भविष्य में और भी विकसित होगी और इंसानों के जीवन को सुगम और आसान बनाएगी।

By Admin

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